Wednesday, April 22, 2015

हनुमान चालीसा - प्रामुख्यता - Hanuman Chalisa in Hindi and its importance

Hanuman Chalisa is one of the most popular Hindu devotional hymns created by Tulsidas in simple common man's language known as Awadhi language which is a form of Hindi (local). It contains forty verses in praise of the supreme form and powers of Lord Hanuman. Besides praising his form and powers, it also describes his many great deeds like bringing back Lakshmana into consciousness, searching for Sita in forests and in Lanka to trace her, and then, burning Lanka, spotting good nature of Vibheeshan and helping Rama in war against Ravana, etc.

This hanuman chalisa, in overall, contains two four lined hymns at the beginning which are known as dohas and a two lined ending hymn at the end which also is a doha, besides the forty hymns known as chaupais. They are called as chaupai because each of these forty hymns are made up of four syllables each, with two syllables in every line

It is a very popular and strong belief among devotees that whoever recites the entire chalisa daily, gets full protection from Hanuman in overcoming the life's problems and in escaping from all evil spirits.

First, I will be giving the entire "hanuman chalisa" text in original language (Hindi/ Awadhi) as written by Tulsidas, starting with the two dohas in the beginning and ending with one more doha at the end with the entire chalisa or forty verses being in the middle.

The entire chalisa is again being given in English text along with their meanings in English language in my next post for the convenience of all other readers who can't read Hindi and who want to know the meaning of each hymns.

Two Dohas
श्रीगुरु चरन  सरोजरज निज मन मुकुर सुधारि ।
वरनउ रघुवर बिमल जसु जो दायक फल चारि ॥ ( 1 )

बुद्धि हीन तनु जानिकै सुमिरौ पवनकुमार  ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेस  विकार ॥ ( 2 )

Forty chalisa chaupais
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहु लोक उजागर ॥ (1 )

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ ( 2 )

महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥ ( 3 ) 

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुंडल कुँचित केसा ॥  ( 4 )

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥  ( 5 )             
शंकर सुवन केसरी नंदन ।
तेज प्रताप महा जग वंदन ॥ ( 6 )

विद्यावान गुनी अति चातुर ।
रामकाज करिबे को आतुर ॥ ( 7 )

प्रभु चरित्र  सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥ ( 8 )

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा ।
विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ( 9 )

भीम रूप धरि असुर संहारे ।
रामचन्द्र के काज संवारे ॥  (10 )

लाय संजीवनि लखन जियाए ।
श्रीरघुवीर हरसि उर लाए ॥  (11 )

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
कहा भरतसम तुम प्रिय भाई ॥ (12 )

सहस बदन तुम्हरो जस गावै । 
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ॥  (13 )

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । 
नारद सारद सहित अहीसा ॥  (14 )

यम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते । 
कबि कोबिद कहि सकै कहाँ तें ॥ (15 )

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा । 
राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ (16 )

तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना । 
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ (17 )

युग सहस्र जोजन पर भानू । 
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ (18 )

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही । 
जलधि लाँघि गए अचरज नाही ॥ (19 )

दुर्गम काज जगत के जेते । 
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ (20 )

राम दुवारे तुम रखवारे । 
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ (21 )

सब सुख लहै तुम्हारी शरना । 
तुम रक्षक काहू को डरना ॥ (22 )

आपन तेज सम्हारो आपै । 
तीनौ लोक हांकते काँपै ॥ (23 )

भूत पिशाच निकट नहि आवै  । 
महाबीर जब नाम सुनावै ॥ (24 )

नासै रोग हरै सब पीरा । 
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ (25 )

संकट से हनुमान छुड़ावै । 
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ (26 )

सब पर राम तपस्वी राजा । 
तिन के काज सकल तुम साजा ॥ (27 )

और मनोरध जो कोई लावै । 
तासु अमित जीवन फल पावै ॥ (28 )

चारों जुग परताप तुम्हारा । 
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ (29 )

साधु संत के तुम रखवारे । 
असुर निकंदन राम दुलारे ॥ (30 )

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । 
अस बर दीन्ह जानकी माता ॥ (31 )

राम रसायन तुम्हरे पासा । 
सदा रहो रघुपति के दासा ॥ (32 )

तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ (33 )

अंत काल रघुबर पुर जाई । 
जहॉ जन्म हरिभक्त  कहाई ॥ (34 )

और देवता चित्त न धरई । 
हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ (35 )

संकट कटै मिटै सब पीरा । 
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ (36 )

जय जय जय हनुमान गोसाई । 
कृपा करहु गुरुदेव की नाई ॥ (37 )

जो शत बार पाठ कर जोई । 
छूटहि बंदि महा सुख होई ॥ (38 )

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । 
होई सिद्धि साखी गौरीसा ॥ (39 )

तुलसीदास सदा हरि चेरा । 
कीजै नाथ ह्रदय महि डेरा ॥ (40 )

Ending Doha
पवन तनय संकट हरन मँगल मूरति रूप । 
राम लखन सीता सहित ह्रदय बसहु सुर भूप ॥ 


It is stated in the 38th hymn above that whoever recites this Hanuman Chalisa hundred times (or most probably 108 times), gets freed from all obstacles and problems and will be bestowed with great prosperity and happiness.

So, seek the blessings of Lord Hanuman by reciting the hanuman chalisa at all occasions.




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